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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 233

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मातु मते महुँ मानि मोहि जो कछु करहिं सो थोर। अघ अवगुन छमि आदरहिं समुझि आपनी ओर॥233॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मुझे माता के मत में मानकर वे जो कुछ भी करें सो थोड़ा है, पर वे अपनी ओर समझकर (अपने विरद और संबंध को देखकर) मेरे पापों और अवगुणों को क्षमा करके मेरा आदर ही करेंगे॥233॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 233 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik