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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 234

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

लगे होन मंगल सगुन सुनि गुनि कहत निषादु। मिटिहि सोचु होइहि हरषु पुनि परिनाम बिषादु॥234॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मंगल शकुन होने लगे। उन्हें सुनकर और विचारकर निषाद कहने लगा- सोच मिटेगा, हर्ष होगा, पर फिर अन्त में दुःख होगा॥234॥

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