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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 235

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

जीति मोह महिपालु दल सहित बिबेक भुआलु। करत अकंटक राजु पुरँ सुख संपदा सुकालु॥235॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मोह रूपी राजा को सेना सहित जीतकर विवेक रूपी राजा निष्कण्टक राज्य कर रहा है। उसके नगर में सुख, सम्पत्ति और सुकाल वर्तमान है॥235॥

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