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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 239

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

लसत मंजु मुनि मंडली मध्य सीय रघुचंदु। ग्यान सभाँ जनु तनु धरें भगति सच्चिदानंदु॥239॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सुंदर मुनि मंडली के बीच में सीताजी और रघुकुलचंद्र श्री रामचन्द्रजी ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो ज्ञान की सभा में साक्षात्‌ भक्ति और सच्चिदानंद शरीर धारण करके विराजमान हैं॥239॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 239 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik