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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 241

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मिलि सपेम रिपुसूदनहि केवटु भेंटेउ राम। भूरि भायँ भेंटे भरत लछिमन करत प्रनाम॥241॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर श्री रामजी प्रेम के साथ शत्रुघ्न से मिलकर तब केवट (निषादराज) से मिले। प्रणाम करते हुए लक्ष्मणजी से भरतजी बड़े ही प्रेम से मिले॥241॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 241 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik