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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 250

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

यह जियँ जानि सँकोचु तजि करिअ छोहु लखि नेहु। हमहि कृतारथ करनलगि फल तृन अंकुर लेहु॥250॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हृदय में ऐसा जानकर संकोच छोड़कर और हमारा प्रेम देखकर कृपा कीजिए और हमको कृतार्थ करने के लिए ही फल, तृण और अंकुर लीजिए॥250॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 250 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik