ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 252

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

निसि न नीद नहिं भूख दिन भरतु बिकल सुचि सोच। नीच कीच बिच मगन जस मीनहि सलिल सँकोच॥252॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी को न तो रात को नींद आती है, न दिन में भूख ही लगती है। वे पवित्र सोच में ऐसे विकल हैं, जैसे नीचे (तल) के कीचड़ में डूबी हुई मछली को जल की कमी से व्याकुलता होती है॥252॥

आगे पढ़ें — अयोध्या काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 252 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik