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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 256

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

अंतरजामी रामु सिय तुम्ह सरबग्य सुजान। जौं फुर कहहु त नाथ निज कीजिअ बचनु प्रवान॥256॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचन्द्रजी और सीताजी हृदय की जानने वाले हैं और आप सर्वज्ञ तथा सुजान हैं। यदि आप यह सत्य कह रहे हैं तो हे नाथ! अपने वचनों को प्रमाण कीजिए (उनके अनुसार व्यवस्था कीजिए)॥256॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 256 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik