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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 257

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सब के उर अंतर बसहु जानहु भाउ कुभाउ। पुरजन जननी भरत हित होइ सो कहिअ उपाउ॥257॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आप सबके हृदय के भीतर बसते हैं और सबके भले-बुरे भाव को जानते हैं, जिसमें पुरवासियों का, माताओं का और भरत का हित हो, वही उपाय बतलाइए॥257॥

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