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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 258

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि। करब साधुमत लोकमत नृपनय निगम निचोरि॥258॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

पहले भरत की विनती आदरपूर्वक सुन लीजिए, फिर उस पर विचार कीजिए। तब साधुमत, लोकमत, राजनीति और वेदों का निचोड़ (सार) निकालकर वैसा ही (उसी के अनुसार) कीजिए॥258॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 258 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik