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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 260

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

महूँ सनेह सकोच बस सनमुख कही न बैन। दरसन तृपित न आजु लगि प्रेम पिआसे नैन॥260॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मैंने भी प्रेम और संकोचवश कभी सामने मुँह नहीं खोला। प्रेम के प्यासे मेरे नेत्र आज तक प्रभु के दर्शन से तृप्त नहीं हुए॥260॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 260 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik