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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 261

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

साधु सभाँ गुर प्रभु निकट कहउँ सुथल सतिभाउ। प्रेम प्रपंचु कि झूठ फुर जानहिं मुनि रघुराउ॥261॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

साधुओं की सभा में गुरुजी और स्वामी के समीप इस पवित्र तीर्थ स्थान में मैं सत्य भाव से कहता हूँ। यह प्रेम है या प्रपंच (छल-कपट)? झूठ है या सच? इसे (सर्वज्ञ) मुनि वशिष्ठजी और (अन्तर्यामी) श्री रघुनाथजी जानते हैं॥261॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 261 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik