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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 265

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सुनि सुर मत सुरगुर कहेउ भल तुम्हार बड़ भागु। सकल सुमंगल मूल जग भरत चरन अनुरागु॥265॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

देवताओं का मत सुनकर देवगुरु बृहस्पतिजी ने कहा- अच्छा विचार किया, तुम्हारे बड़े भाग्य हैं। भरतजी के चरणों का प्रेम जगत में समस्त शुभ मंगलों का मूल है॥265॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 265 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik