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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 269

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देब। सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब॥269॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रसन्न मन से संकोच त्यागकर प्रभु जिसे जो आज्ञा देंगे, उसे सब लोग सिर चढ़ा-चढ़ाकर (पालन) करेंगे और सब उपद्रव और उलझनें मिट जाएँगी॥269॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 269 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik