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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 272

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सुनत जनक आगवनु सबु हरषेउ अवध समाजु। रघुनंदनहि सकोचु बड़ सोच बिबस सुरराजु॥272॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जनकजी का आगमन सुनकर अयोध्या का सारा समाज हर्षित हो गया। श्री रामजी को बड़ा संकोच हुआ और देवराज इन्द्र तो विशेष रूप से सोच के वश में हो गए॥272॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 272 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik