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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 277

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

दोउ समाज निमिराजु रघुराजु नहाने प्रात। बैठे सब बट बिटप तर मन मलीन कृस गात॥277॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

निमिराज जनकजी और रघुराज रामचन्द्रजी तथा दोनों ओर के समाज ने दूसरे दिन सबेरे स्नान किया और सब बड़ के वृक्ष के नीचे जा बैठे। सबके मन उदास और शरीर दुबले हैं॥277॥

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