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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 281

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल। जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल॥281॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अमृत केवल सुनने में आता है और विष जहाँ-तहाँ प्रत्यक्ष देखे जाते हैं। विधाता की सभी करतूतें भयंकर हैं। जहाँ-तहाँ कौए, उल्लू और बगुले ही (दिखाई देते) हैं, हंस तो एक मानसरोवर में ही हैं॥281॥

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