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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 283

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

कौसल्या कह धीर धरि सुनहु देबि मिथिलेसि। को बिबेकनिधि बल्लभहि तुम्हहि सकइ उपदेसि॥283॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कौसल्याजी ने फिर धीरज धरकर कहा- हे देवी मिथिलेश्वरी! सुनिए, ज्ञान के भंडार श्री जनकजी की प्रिया आपको कौन उपदेश दे सकता है?॥283॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 283 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik