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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 287

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

बार बार मिलि भेंटि सिय बिदा कीन्हि सनमानि। कही समय सिर भरत गति रानि सुबानि सयानि॥287॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

राजा-रानी ने बार-बार मिलकर और हृदय से लगाकर तथा सम्मान करके सीताजी को विदा किया। चतुर रानी ने समय पाकर राजा से सुंदर वाणी में भरतजी की दशा का वर्णन किया॥287॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 287 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik