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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 291

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

ग्यान निधान सुजान सुचि धरम धीर नरपाल। तुम्ह बिनु असमंजस समन को समरथ एहि काल॥291॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे राजन्‌! तुम ज्ञान के भंडार, सुजान, पवित्र और धर्म में धीर हो। इस समय तुम्हारे बिना इस दुविधा को दूर करने में और कौन समर्थ है?॥291॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 291 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik