ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 292

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राम सत्यब्रत धरम रत सब कर सीलु स्नेहु। संकट सहत सकोच बस कहिअ जो आयसु देहु ॥292॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचन्द्रजी सत्यव्रती और धर्मपरायण हैं, सबका शील और स्नेह रखने वाले हैं, इसीलिए वे संकोचवश संकट सह रहे हैं, अब तुम जो आज्ञा दो, वह उनसे कही जाए॥292॥

आगे पढ़ें — अयोध्या काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 292 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik