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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 293

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राखि राम रुख धरमु ब्रतु पराधीन मोहि जानि। सब कें संमत सर्ब हित करिअ प्रेमु पहिचानि॥293॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अतएव मुझे पराधीन जानकर (मुझसे न पूछकर) श्री रामचन्द्रजी के रुख (रुचि), धर्म और (सत्य के) व्रत को रखते हुए, जो सबके सम्मत और सबके लिए हितकारी हो आप सबका प्रेम पहचानकर वही कीजिए॥293॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 293 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik