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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 295

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सुर स्वारथी मलीन मन कीन्ह कुमंत्र कुठाटु। रचि प्रपंच माया प्रबल भय भ्रम अरति उचाटु॥295॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मलिन मन वाले स्वार्थी देवताओं ने बुरी सलाह करके बुरा ठाट (षड्यन्त्र) रचा। प्रबल माया-जाल रचकर भय, भ्रम, अप्रीति और उच्चाटन फैला दिया॥295॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 295 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik