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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 296

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राम सपथ सुनि मुनि जनकु सकुचे सभा समेत। सकल बिलोकत भरत मुखु बनइ न ऊतरु देत॥296॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचन्द्रजी की शपथ सुनकर सभा समेत मुनि और जनकजी सकुचा गए (स्तम्भित रह गए)। किसी से उत्तर देते नहीं बनता, सब लोग भरतजी का मुँह ताक रहे हैं॥296॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 296 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik