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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 297

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

निरखि बिबेक बिलोचनन्हि सिथिल सनेहँ समाजु। करि प्रनामु बोले भरतु सुमिरि सीय रघुराजु॥297॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

विवेक के नेत्रों से सारे समाज को प्रेम से शिथिल देख, सबको प्रणाम कर, श्री सीताजी और श्री रघुनाथजी का स्मरण करके भरतजी बोले-॥297॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 297 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik