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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 298

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

कृपाँ भलाईं आपनी नाथ कीन्ह भल मोर। दूषन भे भूषन सरिस सुजसु चारु चहुँ ओर॥298॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे नाथ! आपने अपनी कृपा और भलाई से मेरा भला किया, जिससे मेरे दूषण (दोष) भी भूषण (गुण) के समान हो गए और चारों ओर मेरा सुंदर यश छा गया॥298॥

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