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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 302

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भरतु जनकु मुनिजन सचिव साधु सचेत बिहाइ। लागि देवमाया सबहि जथाजोगु जनु पाइ॥302॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी, जनकजी, मुनिजन, मंत्री और ज्ञानी साधु-संतों को छोड़कर अन्य सभी पर जिस मनुष्य को जिस योग्य (जिस प्रकृति और जिस स्थिति का) पाया, उस पर वैसे ही देवमाया लग गई॥302॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 302 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik