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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 304

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

करम बचन मानस बिमल तुम्ह समान तुम्ह तात। गुर समाज लघु बंधु गुन कुसमयँ किमि कहि जात॥304॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे तात! कर्म से, वचन से और मन से निर्मल तुम्हारे समान तुम्हीं हो। गुरुजनों के समाज में और ऐसे कुसमय में छोटे भाई के गुण किस तरह कहे जा सकते हैं?॥304॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 304 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik