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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 306

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सेवक कर पद नयन से मुख सो साहिबु होइ। तुलसी प्रीति कि रीति सुनि सुकबि सराहहिं सोइ॥306॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सेवक हाथ, पैर और नेत्रों के समान और स्वामी मुख के समान होना चाहिए। तुलसीदासजी कहते हैं कि सेवक-स्वामी की ऐसी प्रीति की रीति सुनकर सुकवि उसकी सराहना करते हैं॥306॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 306 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik