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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 308

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भरत राम संबादु सुनि सकल सुमंगल मूल। सुर स्वारथी सराहि कुल बरषत सुरतरु फूल॥308॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

समस्त सुंदर मंगलों का मूल भरतजी और श्री रामचन्द्रजी का संवाद सुनकर स्वार्थी देवता रघुकुल की सराहना करके कल्पवृक्ष के फूल बरसाने लगे॥308॥

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