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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 314

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

दीनबंधु सुनि बंधु के वचन दीन छलहीन। देस काल अवसर सरिस बोले रामु प्रबीन॥314॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

दीनबन्धु और परम चतुर श्री रामजी ने भाई भरतजी के दीन और छलरहित वचन सुनकर देश, काल और अवसर के अनुकूल वचन बोले-॥314॥

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