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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 315

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मुखिआ मुखु सो चाहिऐ खान पान कहुँ एक। पालइ पोषइ सकल अँग तुलसी सहित बिबेक॥315॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तुलसीदासजी कहते हैं- (श्री रामजी ने कहा-) मुखिया मुख के समान होना चाहिए, जो खाने-पीने को तो एक (अकेला) है, परन्तु विवेकपूर्वक सब अंगों का पालन-पोषण करता है॥315॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 315 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik