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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 317

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तेउ बिलोकि रघुबर भरत प्रीति अनूप अपार। भए मगन मन तन बचन सहित बिराग बिचार॥317॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वे भी श्री रामजी और भरतजी के उपमारहित अपार प्रेम को देखकर वैराग्य और विवेक सहित तन, मन, वचन से उस प्रेम में मग्न हो गए॥317॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 317 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik