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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 318

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

लखनहि भेंटि प्रनामु करि सिर धरि सिय पद धूरि। चले सप्रेम असीस सुनि सकल सुमंगल मूरि॥318॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर लक्ष्मणजी को क्रमशः भेंटकर तथा प्रणाम करके और सीताजी के चरणों की धूलि को सिर पर धारण करके और समस्त मंगलों के मूल आशीर्वाद सुनकर वे प्रेमसहित चले॥318॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 318 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik