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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 319

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भरत मातु पद बंदि प्रभु सुचि सनेहँ मिलि भेंटि। बिदा कीन्ह सजि पालकी सकुच सोच सब मेटि॥319॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरत की माता कैकेयी के चरणों की वंदना करके प्रभु श्री रामचंद्रजी ने पवित्र (निश्छल) प्रेम के साथ उनसे मिल-भेंट कर तथा उनके सारे संकोच और सोच को मिटाकर पालकी सजाकर उनको विदा किया॥319॥

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