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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 323

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि। सिंघासन प्रभु पादुका बैठारे निरुपाधि॥323॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी ने यह सुनकर और शिक्षा तथा बड़ा आशीर्वाद पाकर ज्योतिषियों को बुलाया और दिन (अच्छा मुहूर्त) साधकर प्रभु की चरणपादुकाओं को निर्विघ्नतापूर्वक सिंहासन पर विराजित कराया॥323॥

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