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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 325

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

नित पूजत प्रभु पाँवरी प्रीति न हृदयँ समाति। मागि मागि आयसु करत राज काज बहु भाँति॥325॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वे नित्य प्रति प्रभु की पादुकाओं का पूजन करते हैं, हृदय में प्रेम समाता नहीं है। पादुकाओं से आज्ञा माँग-माँगकर वे बहुत प्रकार (सब प्रकार के) राज-काज करते हैं॥325॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 325 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik