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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 43

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

गइ मुरुछा रामहि सुमिरि नृप फिरि करवट लीन्ह। सचिव राम आगमन कहि बिनय समय सम कीन्ह॥43॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इतने में राजा की मूर्छा दूर हुई, उन्होंने राम का स्मरण करके (‘राम! राम!’ कहकर) फिरकर करवट ली। मंत्री ने श्री रामचन्द्रजी का आना कहकर समयानुकूल विनती की॥43॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 43 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik