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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 44

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तुम्ह प्रेरक सब के हृदयँ सो मति रामहि देहु। बचनु मोर तजि रहहिं घर परिहरि सीलु सनेहु॥44॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आप प्रेरक रूप से सबके हृदय में हैं। आप श्री रामचन्द्र को ऐसी बुद्धि दीजिए, जिससे वे मेरे वचन को त्यागकर और शील-स्नेह को छोड़कर घर ही में रह जाएँ॥44॥

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