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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 45

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मंगल समय सनेह बस सोच परिहरिअ तात। आयसु देइअ हरषि हियँ कहि पुलके प्रभु गात॥45॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पिताजी! इस मंगल के समय स्नेहवश होकर सोच करना छोड़ दीजिए और हृदय में प्रसन्न होकर मुझे आज्ञा दीजिए। यह कहते हुए प्रभु श्री रामचन्द्रजी सर्वांग पुलकित हो गए॥45॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 45 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik