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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 46

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मुख सुखाहिं लोचन स्रवहिं सोकु न हृदयँ समाइ। मनहुँ करुन रस कटकई उतरी अवध बजाइ॥46॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सबके मुख सूखे जाते हैं, आँखों से आँसू बहते हैं, शोक हृदय में नहीं समाता। मानो करुणा रस की सेना अवध पर डंका बजाकर उतर आई हो॥46॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 46 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik