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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 49

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सीय कि पिय सँगु परिहरिहि लखनु करहिहहिं धाम। राजु कि भूँजब भरत पुर नृपु कि जिइहि बिनु राम॥49॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

क्या सीताजी अपने पति (श्री रामचंद्रजी) का साथ छोड़ देंगी? क्या लक्ष्मणजी श्री रामचंद्रजी के बिना घर रह सकेंगे? क्या भरतजी श्री रामचंद्रजी के बिना अयोध्यापुरी का राज्य भोग सकेंगे? और क्या राजा श्री रामचंद्रजी के बिना जीवित रह सकेंगे? (अर्थात्‌ न सीताजी यहाँ रहेंगी, न लक्ष्मणजी रहेंगे, न भरतजी राज्य करेंगे और न राजा ही जीवित रहेंगे, सब उजाड़ हो जाएगा।)॥49॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 49 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik