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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 51

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

नव गयंदु रघुबीर मनु राजु अलान समान। छूट जानि बन गवनु सुनि उर अनंदु अधिकान॥51॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचंद्रजी का मन नए पकड़े हुए हाथी के समान और राजतिलक उस हाथी के बाँधने की काँटेदार लोहे की बेड़ी के समान है। ‘वन जाना है’ यह सुनकर, अपने को बंधन से छूटा जानकर, उनके हृदय में आनंद बढ़ गया है॥51॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 51 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik