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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 55

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राजु देन कहिदीन्ह बनु मोहि न सो दुख लेसु। तुम्ह बिनु भरतहि भूपतिहि प्रजहि प्रचंड कलेसु॥55॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

राज्य देने को कहकर वन दे दिया, उसका मुझे लेशमात्र भी दुःख नहीं है। (दुःख तो इस बात का है कि) तुम्हारे बिना भरत को, महाराज को और प्रजा को बड़ा भारी क्लेश होगा॥55॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 55 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik