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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 56

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

यह बिचारि नहिं करउँ हठ झूठ सनेहु बढ़ाइ। मानि मातु कर नात बलि सुरति बिसरि जनि जाइ॥56॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यह सोचकर झूठा स्नेह बढ़ाकर मैं हठ नहीं करती! बेटा! मैं बलैया लेती हूँ, माता का नाता मानकर मेरी सुध भूल न जाना॥56॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 56 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik