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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 57

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

समाचार तेहि समय सुनि सीय उठी अकुलाइ। जाइ सासु पद कमल जुग बंदि बैठि सिरु नाइ॥57॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उसी समय यह समाचार सुनकर सीताजी अकुला उठीं और सास के पास जाकर उनके दोनों चरणकमलों की वंदना कर सिर नीचा करके बैठ गईं॥57॥

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