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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 59

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

करि केहरि निसिचर चरहिं दुष्ट जंतु बन भूरि। बिष बाटिकाँ कि सोह सुत सुभग सजीवनि मूरि॥59॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हाथी, सिंह, राक्षस आदि अनेक दुष्ट जीव-जन्तु वन में विचरते रहते हैं। हे पुत्र! क्या विष की वाटिका में सुंदर संजीवनी बूटी शोभा पा सकती है?॥59॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 59 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik