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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 60

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

कहि प्रिय बचन बिबेकमय कीन्हि मातु परितोष। लगे प्रबोधन जानकिहि प्रगटि बिपिन गुन दोष॥60॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

विवेकमय प्रिय वचन कहकर माता को संतुष्ट किया। फिर वन के गुण-दोष प्रकट करके वे जानकीजी को समझाने लगे॥60॥

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