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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 63

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सहज सुहृद गुर स्वामि सिख जो न करइ सिर मानि। सो पछिताइ अघाइ उर अवसि होइ हित हानि॥63॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

स्वाभाविक ही हित चाहने वाले गुरु और स्वामी की सीख को जो सिर चढ़ाकर नहीं मानता, वह हृदय में भरपेट पछताता है और उसके हित की हानि अवश्य होती है॥63॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 63 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik