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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 64

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

प्राननाथ करुनायतन सुंदर सुखद सुजान। तुम्ह बिनु रघुकुल कुमुद बिधु सुरपुर नरक समान॥64॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे प्राणनाथ! हे दया के धाम! हे सुंदर! हे सुखों के देने वाले! हे सुजान! हे रघुकुल रूपी कुमुद के खिलाने वाले चन्द्रमा! आपके बिना स्वर्ग भी मेरे लिए नरक के समान है॥64॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 64 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik